Sunday, 20 November 2016

रिश्ता मोहब्बत का

मौंजों का साहिल से
साहिल का मौंजों से
रिश्ता है कितना पुराना
हमने न जाना तुमने न जाना
कायनात का कारीगर
परवरदिगार है उसी ने ये जाना
दोनों की मोहब्बत
पाक गंगा सम निर्मल पावन
जहाँ ने ये देखा
सबने ये माना
हमने भी तुमने भी माना
अम्बर में टिम टिम झिलमिलाते सितारों
कब जमीं पे है आते
सब ने ये जाना
टिमटिमाते तारों का अम्बर से
रिश्ता उतना ही है पुराना
उपवन का माली से
फूलों का डाली से
खेतों का माली से
रिश्ता है उतना ही पुराना
हमने भी जाना तुमने भी जाना
पेडों का पंछियों के नीड से
नेताओ का जमाने की भीड से
आदमी का रीढ से
रिश्ता उतना ही......
महबूब का मोहब्बत से
महबूबा का एतबार और प्यार से
यारी का यार से
लोहे का लोहार से
सोने का सुनार से
पृमिका का प्यार से
रिश्ता उतना ही है पुराना
जितना हमने भी जाना.....
चंदा का चाँदनी से
कवि का रागिनी से
भंवरों का नन्हें फूल से (कलियों से)
सहराओ का उडती हुई धूल से
कुमुदनी का जलाशय से
टीचर का आशय से
टीटी का रेल से
जेलर का जेल से
खिलाडी का खेल से
रिश्ता उतना ही है पुराना.....
मानव का जीवन
मधुवन का खग से
साधू का जग से
रिश्ता उतना ही है पुराना....
साहिल का मौंजों से
सैनिक का सरहदों से
महबूब का मोहब्बत से
रिश्ता उतना ही है पुराना....
पृियतम का प्यार
दिल का दुलार
भावनाओ का मन से
जिद्दी का तन से
प्यार का उपवन से
रिश्ता उतना ही है पुराना.....

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव