ज्योत से ज्योत जलती है साँवरिया
तेरी मोहब्बत भरी महक से महकती है दुनियाँ
आज भी आग लगती है बाँस के वन में
जब बहती है हवा विरहणी राधिका के शाप की
जो पत्ता टूटके शाख से बिछुड जाता है
वो हमेशा के लिये अपना असतित्व गँवाता है
दिल गोते लगाता है उसकी मोहब्बत की माजक मौंजों में
मौंजों के पृचण्ड वेग को साहिल बन समाता है साँवरिया
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