Monday, 21 November 2016

साँवरिया तेरी मोहब्बत में हम दीवाने हो गये

ज्योत से ज्योत जलती है साँवरिया
तेरी मोहब्बत भरी महक से महकती है दुनियाँ

आज भी आग लगती है बाँस के वन में
जब बहती है हवा विरहणी राधिका के शाप की

जो पत्ता टूटके शाख से बिछुड जाता है
वो हमेशा के लिये अपना असतित्व गँवाता है

दिल गोते लगाता है उसकी मोहब्बत की माजक मौंजों में
मौंजों के पृचण्ड वेग को साहिल बन समाता है साँवरिया

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव