Tuesday, 15 November 2016

मोहब्बत की मादक महक

तुम्हारी मोहब्बत की मादक महक ने
जिन्दगी का चैनों अमन सनम चुराया है

दिल के महकते उपवन में
परदेशी अंजान भृमर ने कोहराम मचाया

पूरब से चली जो पूरवाई
जिन्दगी की फिजा आज उसने महकाई

यौवन रस की शबनमी मादक महक
सारी कायनात और फिजा में छाई

तनहाईयों के आलम में यारो
ख्वाबगाह की खामोशी मोहब्बत की मादक महक से शर्माई

परदेशी के आने से पहले
डगर मचल उठी फिजा महकी और मुस्काई

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव