चंद अल्फाज मचलते है
लकीरों की शक्ल में उभरते है
दिल के अरमाँ साँचे में ढलते है
आरजुये दिल बयाँ ये करते हैं
ज्यों मचलती हैं मौंजें सागर के सीने में
मोहब्बत की बयार पूरब से चलती है
दर्दे मोहब्बत अश्कों से बयाँ होता है
दिल मोहब्बत का आईना होता है
मेरे महबूब की मोहब्बत की महक से वाकिफ हूँ मैं
वाकिफ है फिजा ये कायनात
ये चाँद तारे
दिल की हरेक धडकन मचलती मादक मौंजों सी
हरेक पल हरेक घडी सिर्फ तुझको ही पुकारे आजा आजा
मोहब्बत का दिल की धडकन से दीदार होता है
हरेक शंय में तेरी ही अनुभूति एतबार होता है
वो मोहब्बत भरे महकते अल्फाज तुम्हारे
हरेक पल हरेक घडी मेरे महबूब सिर्फ तुम्हीं को पुकारे
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