Saturday, 5 November 2016

मोहब्बत अल्फाजों से मचलती है

चंद अल्फाज मचलते है
लकीरों की शक्ल में उभरते है

दिल के अरमाँ साँचे में ढलते है
आरजुये दिल बयाँ ये करते हैं

ज्यों मचलती हैं मौंजें सागर के सीने में
मोहब्बत की बयार पूरब से चलती है

दर्दे मोहब्बत अश्कों से बयाँ होता है
दिल मोहब्बत का आईना होता है

मेरे महबूब की मोहब्बत की महक से वाकिफ हूँ मैं
वाकिफ है फिजा ये कायनात
ये चाँद तारे

दिल की हरेक धडकन मचलती मादक मौंजों सी
हरेक पल हरेक घडी सिर्फ तुझको ही पुकारे आजा आजा

मोहब्बत का दिल की धडकन से दीदार होता है
हरेक शंय में तेरी ही अनुभूति एतबार होता है

वो मोहब्बत भरे महकते अल्फाज तुम्हारे
हरेक पल हरेक घडी मेरे महबूब सिर्फ तुम्हीं को पुकारे

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव