Thursday, 17 November 2016

आशियाना ए दिल

महबूब मोहब्बत का आसमाँ है
उसके आगे छोटा सारा का सारा जहाँ है

उसके  अहसास मात्र से भी छलकती है मोहब्बत
जैसे चाँदनी से छलकती शबनमी मोतियो की बयार है

याद करने से पहले उसे पास पाता हूँ
तनहाईयों में बरसती है मोहब्बत ज्यो मादक बयार

उसकी हरेक खुशी और गम का मुझे अहसास है
मंजिल है मेरी मोहब्बत आशियाना ए दिल मे आबाद है

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव