Friday, 18 November 2016

तेरी मोहब्बत रूह है जिस्म की साँवरिया

मेरे पृियतम अपनी वफाओ का इकरार करता हूँ
दिल की धडकनों में बसने वाले जाँ से ज्यादा प्यार करता हूँ

वाकिफ हूँ इस हकीकत से पृियतम प्यारे
जिस्म मे धडकन तुझी से है मेरे महबूब

साँस बनके मोहब्बत भरे दिल को धडकाता हूँ
बासुरियाँ की सुमधुर तान से दिलों की धडकन में बस जाता है तू

बिन तेरे सहराओ की मानिंद ये जिस्म है साँवरिया
तेरी मोहब्बत की महकती से जिन्दगी आबाद कन्हैया

दिल के तार झनझना उठते है पृियतम प्यारे
जब तेरी मोहब्बत बरसती है साँवरिया

तेरी बाँसुरी की तान जमाने के रंजो गम भुलाती है
जब तेरी याद आती दिल की कुमुदनी कायनात महकाती है

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव