Friday, 25 November 2016

उपवन

उपवन का माली
महकती फूलों की डाली
दिल बाग बाग हो जाता
जब कभी उपवन में आता
हरेक फूल , नन्हीं कली
मुस्कुराहट मै दिल से देख
बाग बाग दिल हो जाता
जब कोई फूल तोडता
फुलों की महक से फिजा
मुस्कुराती सी लगती
जब गजरे मे ढलके सुमन
गोरी के मादक गेसू सजाते
और सुन्दरता में चार चाँद लगाते
मै  माली दिल ही दिल मुस्कुराता
जब दिली मोहब्बत
फूलों से उमडती
दिल सैलाभे अश्क
डूब जाता
फूलों की मोहब्बत
मैं मे माली
सतत अश्क बहाता
फिर फूलों को
देव सिर समर्पित देख
दिल मुस्कुराता
कभी शहीदों के शव समर्पित
दिल रोता हँसता अश्क बहाता
फूलों से महकती
ये दुनियाँ सारी
जर्रा जर्रा ए कायनात
हरेक डगर
सारा जहाँ
हम रिणी फूलों के
उसकी मोहब्बत के
कुमुदनी और सुमन के
शेफाली और चम्पा डाली
उपवन और माली
अम्बर की खुबसूरत लाली
खुबसूरत कन्या
महकते गेसू
नूरे रूखसार
रूपवती नार
नौ लखा हार
गौरी का सिंगार
मोगरा की मोहब्बत
धडकता दिल
उमडता प्यार

मनोहर यादव
" अमृत सागर "

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव