उपवन का माली
महकती फूलों की डाली
दिल बाग बाग हो जाता
जब कभी उपवन में आता
हरेक फूल , नन्हीं कली
मुस्कुराहट मै दिल से देख
बाग बाग दिल हो जाता
जब कोई फूल तोडता
फुलों की महक से फिजा
मुस्कुराती सी लगती
जब गजरे मे ढलके सुमन
गोरी के मादक गेसू सजाते
और सुन्दरता में चार चाँद लगाते
मै माली दिल ही दिल मुस्कुराता
जब दिली मोहब्बत
फूलों से उमडती
दिल सैलाभे अश्क
डूब जाता
फूलों की मोहब्बत
मैं मे माली
सतत अश्क बहाता
फिर फूलों को
देव सिर समर्पित देख
दिल मुस्कुराता
कभी शहीदों के शव समर्पित
दिल रोता हँसता अश्क बहाता
फूलों से महकती
ये दुनियाँ सारी
जर्रा जर्रा ए कायनात
हरेक डगर
सारा जहाँ
हम रिणी फूलों के
उसकी मोहब्बत के
कुमुदनी और सुमन के
शेफाली और चम्पा डाली
उपवन और माली
अम्बर की खुबसूरत लाली
खुबसूरत कन्या
महकते गेसू
नूरे रूखसार
रूपवती नार
नौ लखा हार
गौरी का सिंगार
मोगरा की मोहब्बत
धडकता दिल
उमडता प्यार
मनोहर यादव
" अमृत सागर "
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