Friday, 18 November 2016

मैं सागर विशाल ह्दय

मैं सागर विशाल ह्रदय
फिर क्यों खाली तेरी गागर
अन्नंत छितिज तक मेरा साया
क्यों न में तेरे दिल को भाया
तू यौवन की मौंज मघु
मैं पृियतम अन्नतकाल से पृियतम
कबसे डगर निहार रहा
ए मोहब्बत की मादक मौंजों
साहिल की बाँहे फडक रही
दो जिस्म एक जाँ तुम हो जाओ
मैं खार प्यार तुम्हारा पृियतम
अब तो इन बाहों में समा जाओ
भोर का तारा मोहब्बत बरसाता
मोहब्बत का अभिनंदन लगता प्यारा
खार हुई प्यार में मीठी
अम्बर से बरसती शबनमी मोहब्बत
अवनी और अम्बर का मिलन
जैसे मौंजों का साहिल की बाहों में समाना
मोहब्बत आज हुई पृफुल्लित
जैसे सहराओ मे मधुर बयार
उन्मादित मौंजों को मिला साहिल का प्यार
जिन्दगी मोहब्बत की तान छेडती
दिल को हुआ मोहब्बत पे एतबार
तेरी मोहब्बत तेरा प्यार
दिल की धडकन ज्यो एतबार
तू ही दिल की धडकन पृियतम
तूही जिस्म की रूह मेरे यार
तुम्हारी मोहब्बत से धडकता है दिल
मचलता है दिल तुम्हारी मोहब्बत में यार
आशियाना ए दिल में बसा लो पृियतम
बेकरार दिल को आये करार
जर्रा जर्रा गवाह मोहब्बत का पृियतम
रोम रोम मचलता मोहब्बत मे यार
तुम आरजुये दिल की पृियतम
तुम्ही महकती शबनमी चाँदनी
तुम्ही अम्बर से बरसती रसधार
सदियों पुराना है साथ हमारा
सदियों से तुम्हारी मोहब्बत का एतबार
हम तुम जिस्म दो रूह एक करो दिली एतबार

मनोहर यादव
अमृत सागर

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव