मचलती मौंजें चाहत है हमारी
शबनमी चाँदनी लगती बहुत प्यारी
साहिल की आरजु है दिल में बसाने की
समाँ बहुत ही मादक है जबसे हुई यारी
ख्वाबगाह जन्नत से प्यारी
ख्वाहिश यही हो मुलाकात हमारी
चाँदनी के शबनमी मोतियों का हो बिछौना
अम्बर से बरसे महकती खुमारी
तेरी पायल की झन्कार
बस गई सनम दिलवा हमार
जिस्म की मादक महक
छेड गई हमरे दिलवा के तार
भोर में नन्हें रवि का आना
गौरैया का फुदक कर आना
चिडिया चिडवे का चोंच में दाना लाना
नन्हीं चिड्डयौं को मुह में खिलना
यौवन की दहलीज पर आते
घरौदा छोडकर फुर्र हो जाना
अपने पालकों का भुलाना
फिर कभी लौटके न आना
क्या यही है विधि का विधान
क्या यही है धर्म इमान
धरती का मानव
कृतक मनोहर हैरान अंजान
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