Saturday, 19 November 2016

मचलती मौंजें सागर की

मचलती मौंजें चाहत है हमारी
शबनमी चाँदनी लगती बहुत प्यारी
साहिल की आरजु है दिल में बसाने की
समाँ बहुत ही मादक है जबसे हुई यारी

ख्वाबगाह जन्नत से प्यारी
ख्वाहिश यही हो मुलाकात हमारी
चाँदनी के शबनमी मोतियों का हो बिछौना
अम्बर से बरसे महकती खुमारी

तेरी पायल की झन्कार
बस गई सनम दिलवा हमार
जिस्म की मादक महक
छेड गई हमरे दिलवा के तार

भोर में नन्हें रवि का आना
गौरैया का फुदक कर आना
चिडिया चिडवे का चोंच में दाना लाना
नन्हीं चिड्डयौं को मुह में खिलना
यौवन की दहलीज पर आते
घरौदा छोडकर फुर्र हो जाना
अपने पालकों का भुलाना
फिर कभी लौटके न आना
क्या यही है विधि का विधान
क्या यही है धर्म इमान
धरती का मानव
कृतक मनोहर हैरान अंजान

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव