मोहब्बत - 4
मोहब्बत की महक से महकती दुनियाँ सारी है
तुम्हारी यारी से रौशन शबनमी जिन्दगी हमारी है
तुम्हारी यारी से रौशन शबनमी जिन्दगी हमारी है
दिल की हरेक धडकन मोहब्बत तुम्हारी है
दिल ही दिल में दिल ने कहा आपकी यारी दिल से प्यारी है
दिल ही दिल में दिल ने कहा आपकी यारी दिल से प्यारी है
काँटों भरी डगर ऐ मोहब्बत से वाकिफ दुनियाँ सारी है
फिर भी जर्रा जर्रा मोहब्बत में मशगूल, अपनी यारी है
फिर भी जर्रा जर्रा मोहब्बत में मशगूल, अपनी यारी है
मोहब्बत करने वाले उसूलों से अंजान नही होते
मोहब्बत मे होते हैं परेशां कभी कभी हैरां नही होते
मोहब्बत मे होते हैं परेशां कभी कभी हैरां नही होते
तेरी मोहब्बत जुनूने जिन्दगी है मेरे यार
तेरी मोहब्बत मे जनम लेगें हजारों बार
तेरी मोहब्बत मे जनम लेगें हजारों बार
मोहब्बत करने वालों को मिलती है मंजिल कभी कभार
आशिकों की मजारों पर महकते हैं गुल हजार
आशिकों की मजारों पर महकते हैं गुल हजार
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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