Friday, 2 December 2016

मोहब्बत - 4

मोहब्बत - 4

मोहब्बत की महक से महकती दुनियाँ सारी है
तुम्हारी यारी से रौशन शबनमी जिन्दगी हमारी है
दिल की हरेक धडकन मोहब्बत तुम्हारी है
दिल ही दिल में दिल ने कहा आपकी यारी दिल से प्यारी है
काँटों भरी डगर ऐ मोहब्बत से वाकिफ दुनियाँ सारी है
फिर भी जर्रा जर्रा मोहब्बत में मशगूल, अपनी यारी है
मोहब्बत करने वाले उसूलों से अंजान नही होते
मोहब्बत मे होते हैं परेशां कभी कभी हैरां नही होते
तेरी मोहब्बत जुनूने जिन्दगी है मेरे यार
तेरी मोहब्बत मे जनम लेगें हजारों बार
मोहब्बत करने वालों को मिलती है मंजिल कभी कभार
आशिकों की मजारों पर महकते हैं गुल हजार
मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव