Friday, 2 December 2016

मोहब्बत - 3

मोहब्बत - 3

तेरी यादों वादों का ही सहारा है
वरना सारे जहाँ ने कर लिया किनारा है
सिवा तेरे कोई नही इस जिन्दगी मेरे हुजूर
तनहाईयों में तेरी यादों से हो रहा गुजारा है
चलते रहने का नाम दुनियाँ दारी है
रंगीन हँसी अल्फाजों के मार्फत यारी हमारी है
आहिस्ता आहिस्ता स्वर्णिम अल्फाज जिन्दगी के
पल पल हरेक पल गुजरते ही जा रहे हैं
मेरे साँवरिया दो जिस्म एक जाँ होने के दिन
तेरी मधुर तान में मिल जाने के दिन पल पल करीब आ रहे हैं
मेरी जिन्दगी की हरेक साँस तुम्हारे ही नाम है
पृियतम प्यारे जिन्दगी को तेरी रहमत से शबनमी पृनाम है
तेरे ही नूर से रौशन ये जर्रा जर्रा ये दुनियाँ सारी है
मेरे मन मोहना बृझधाम की माखन सी धूल लगती बहुत प्यारी है
काहे तुमने मोय भुलाय दयो है कन्हाई
मैने तो मन मंदिर में मोहनी सुरतिया बसाई
तेरी मोहब्बत मे सारी दुनियाँ भुलाई
तेरी मोहब्बत की रौशनी मन मे बसाई
मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव