मोहब्बत में जख्म पायें महबूबे मोहब्बत से हमनें
जिन्दगी दरिया ऐ अश्क हो गई यादों में उनकी
अहसास इस बात का दिल को सदियों से है हमारें
जिन्दगी की चाहत मेरे हमदम चँंदा की शबनमी चाँदनी से प्यारे
दिल की धडकन है सबब ए मोहब्बत मेरे सनम
आरदुयें दिल मेरे महबूब दिलों जाँ से प्यारें
अश्कों को सिवा कुछ भी तो न पाया तुमसें
आरजुयें जिन्दगी में मौत को दिल में बसाया हमने
तेरी मोहब्बत की इन्तहा से वाकिफ यार हुयें !
तेरी मोहब्बत की इबादत के तलबगार हम हुयें !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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