Friday, 16 December 2016

वक्त

वक्त ने जो कुछ सिखाया हमकों
गाँठ बाँध दिल में गाँठ बसाया उसको

सच्ची मोहब्बत की ख्वाहिश पूरी होती है
दिली आरजू कभी अधूरी नही रहती

मोहब्बत की महक से महकती है कायनात
चिडियों की चहक से महकती है जिन्दगी

मोहब्बत से लबरेज दिलों जिगर है हमारा
मेरा महबूब पूनम की चाँदनी से प्यारा

मोहब्बत की सागरमय से पीते है शबनमी हाला
छलकती सागरमय से शुकूँ दिल को मिलता है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव