वक्त ने जो कुछ सिखाया हमकों
गाँठ बाँध दिल में गाँठ बसाया उसको
सच्ची मोहब्बत की ख्वाहिश पूरी होती है
दिली आरजू कभी अधूरी नही रहती
मोहब्बत की महक से महकती है कायनात
चिडियों की चहक से महकती है जिन्दगी
मोहब्बत से लबरेज दिलों जिगर है हमारा
मेरा महबूब पूनम की चाँदनी से प्यारा
मोहब्बत की सागरमय से पीते है शबनमी हाला
छलकती सागरमय से शुकूँ दिल को मिलता है
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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