तुम्हारी बाँसुरिया की तान बहुत तडपाती है
बैरन विरहणी की निंदिया उठाती है
चहु ओर फिजा में मादक धुन है गुँजती
पृियतम हरेक पल तुम्हारी मोहब्बत याद आती है
बैरन विरहणी की निंदिया उठाती है
चहु ओर फिजा में मादक धुन है गुँजती
पृियतम हरेक पल तुम्हारी मोहब्बत याद आती है
तेरी याँदों के सहारे पल पल गुँजर दाते है
जग में रिपू बहु भाँति तडपाते है
जग में रिपू बहु भाँति तडपाते है
तेरी मोहब्बत के प्यासे ये दो नैन
राह तकत दिन रैन, कहो कबहू मिलेगों चैन
राह तकत दिन रैन, कहो कबहू मिलेगों चैन
अपनी मोहब्बत की नेमत माधव बरसाओ
तुरत फुरत पृियतम तुम आओ जीवन सफल बनाओ
तुरत फुरत पृियतम तुम आओ जीवन सफल बनाओ
मेरे जिस्म की रूह तुम्हीं साँवरियाँ
तुम बिन कैसे जिये पृियतम ये बावरियाँ
तुम बिन कैसे जिये पृियतम ये बावरियाँ
मनोहर यादव "अमृत सागर "
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