अद्भुद अदम्य निडर छवि तुम्हारी
मुह ललाट जुल्फ अति शोभित भँवे न्यारी
नैनन से सब कछु कह देती पृतिभा प्यारी
नूरे रूखसार भव्य अनुपम भाव भंगिमा प्यारी !
नियति पतंगे की कुर्बानी मोहब्बत में
फिर फिर शमाँ लगती है बहुत प्यारी
जिन्दगी की बाजी दाँव लगाकर
अंजान भृमर को लगती नन्हीं कुमुदनी अति प्यारी !
No comments:
Post a Comment