Sunday, 4 December 2016

दामन


१ 
गुलों ने दामन दागदार किया ।
और काँटो ने दामन बचाया है।।
जिसे समझा था अपना हमने।
उसी ने आँचल उडाया है।।
२ 
मोहब्बत को सरेआम रूसवा करके ।
दिल के अरमानो को मिट्टी मे मिलाया है।
अपना समझा था जिसे दिल से हमने।
उसी ने रूसवा करके 8 /8 आँसू रूलाया है।।



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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव