१
गुलों ने दामन दागदार किया ।
और काँटो ने दामन बचाया है।।
जिसे समझा था अपना हमने।
उसी ने आँचल उडाया है।।
२
मोहब्बत को सरेआम रूसवा करके ।
दिल के अरमानो को मिट्टी मे मिलाया है।
अपना समझा था जिसे दिल से हमने।
उसी ने रूसवा करके 8 /8 आँसू रूलाया है।।
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
No comments:
Post a Comment