Sunday, 4 December 2016

मेरी जिन्दगी

जब तुम हो
साथ मेरे
सभी मुश्किले
खुद-ब-खुद
हल हो जायेंगी
तमाम बाधायें मार्ग की
अपना रास्ता
स्वयं बदल लेगी
क्योकि
आज दो मुकद्दर
फिर से एक हैं
मंजिल की खोज है
डगर भी अंजान
कौई अपना है
कौन पराया नही हमे
उसकी पहचान
जिन्दगी साथ है
मोहब्बत है
आशियाना ए दिल में
फिर क्या बात है
तुम तुम्ही से मंजिल
आसान होगी
मंजिल अवश्य मिलेगी
तुम जिन्दगी की आस
जब तुम्हारा हाथ, हाथ में है
मेरा मुकद्दर साथ में है
क्योकि मंजिल की
जद्दो जहज में
मेरी मोहब्बत
मेरी जिन्दगी तुम
हा तुम साथ हो मेरे
हरेक मोड पे मंजिल का
दीदार हो रहा लगता है
तुम जिन्दगी
तुम से मंजिल
तुमसे ये कारवां है
तुम्ही से रौशन ये दुनियाँ
तुम्ही से
सब कुछ तुम्ही तो हो

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव