Friday, 2 December 2016

तडप

तडप

तडप के देख किसी की मोहब्बत मे,
तो पता चलेगा कि इंतज़ार क्या होता है,
यु मिल जाए अगर महबूब बिना तडप के,
तो कैसे पता चले के प्यार क्या होता है…

कई एक रातें  गुजारी हमने 
महबूबे मोहब्बत की तड़प में 
कई बार जनम हमने लिया 
मोहब्बत उनकी पाने को 
बेदर्द ज़माने को 
कभी दया न हमपे आई 
हर जैम में मिटा दिया 
एक दूजे के लिए 
फिर फिर नया 
जनम लेकर धरा पे आने को 

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव