अपनी आंखो मे समंदर समाये बैठे है
अपनी आंखो मे
समंदर समाये बैठे है
आशिक की मोहब्बत को
जिन्दगी बनाये बैठे है
गर महबूब मोहब्बत को
न पा सके
जिन्दगी लुटाने का मन
आपकी सौ बनाये बैठे है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
No comments:
Post a Comment