बिखरे हुये गेसू नूरे रूखसार जब याद आता है
कसम पाक परवरदिगार की रातों की नींदे उडाता है
तनहाईयों में मचलने लगते है अरमाँ दिल के
जब मेरे महबूब का बूत ख्वाबगाह में आता है
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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