Saturday, 10 December 2016

दास्तांने दर्दे दिल

दास्तांनें दर्दे दिल उनकों ही सुनायेगें !
मोहब्बत में हरेक हद से गुजर जायेगें !

मोहब्बत की सरगम जो छेडेगें
मोहब्बत भरे अल्फाजों में सरगम समायेगें

दरिया ए जिस्म में रूह बनके गोते लगायेंगें
उनकी मोहब्बत को इबादत समझके अपनायेंगें

तनहाईयों में ख्वाबगाह उनकी यादों से सजायेंगें
बाँसुरियाँ की मादक धुन को तन मन में बसायेंगें

सर्द सर्द सुबहों में कुमुदनी को गले लगायेंगें !
चाँदनी के शबनमी मोतियों की माला उम्हें पहनायेंगें !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव