Thursday, 8 December 2016

तपिश

आग में तपने से कुंदन में निखार आता है
काँटों के बीच खिलते गुलाब पे प्यार आता है
यू तो कुमुदनी खिलती है मेरे यार कीचड में
कुमुदनी की महक ओ रौनक से कायनातों फिजा सँवर जाती है

अपने कर्मो से इन्सान जन्नत ओ नरक सा फल पाता है
कठोर मेहनत ओ संघर्ष से इन्सान अादमी बन जाता है

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव