आग में तपने से कुंदन में निखार आता है
काँटों के बीच खिलते गुलाब पे प्यार आता है
यू तो कुमुदनी खिलती है मेरे यार कीचड में
कुमुदनी की महक ओ रौनक से कायनातों फिजा सँवर जाती है
अपने कर्मो से इन्सान जन्नत ओ नरक सा फल पाता है
कठोर मेहनत ओ संघर्ष से इन्सान अादमी बन जाता है
No comments:
Post a Comment