Tuesday, 6 December 2016

ख्वाब में एक ख्वाब

ख्वाब में एक ख्वाब
अँखिंयों की पलकों पे एक चुम्बन
और जिस्म में सनसनाहट
और मनोवेग का आंदोलित होना
तुम सही है , एक सुनहरा ख्वाब
मैने देखें जो सुनहरे ख्वाब
जो कभी न हुये पूरे
रह गये सर्वथा अधूरे
दिन में चाहे रातों में
देखें चाहे अन देखें
क्या कुछ कम हुआ
क्या कुछ मैने पाया
क्या कुछ गंवाया मैने
ख्वाब में एक ख्वाब
ख्वाबगाह में ख्वाहिशे ख्वाब
जब कभी मै सोचता
तुम्हारे ही ख्यालों में
खुद को गुम पाता हूँ
तुम्हारा चेहरा हाथों के बीच
सुनहरी यादों और हँसी वादों के
दर्मिया हम तुम , तुम हम
या परवरदिगार
रहम कर मेरे रब
ये कायनात तुम्हारी
जिन्दगी जो बक्शीश तुम्हारी
ख्वाहिश है हमारी
नूरे रूखसार से रौशन रहे
कायनातों फिजा
या रब, परवरदिगार
वो सुनहरे ख्वाब
जो सजोये हमने ख्वाबगाह मे
तेरी इबादत में
भूला के रंजो गम जिन्दगी के
ख्वाबों में सजोया एक स्वर्णिम ख्वाब

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव