हरेक लम्हें को सुहाना बनायें यारो
अपनी मोहब्बत से जमाना महकायें
महबूबे मोहब्बत की डगर गुलाब दलों से सजायें
अपनी मोहब्बत की महक से सहराओं को महकायें
पूनम की शबनमीं चाँदनी के मोतियों से तेरा सिंगारू करू
आ बैठ पास मेरे, तुझे देखू मोहब्बत करू तेरा एतबार करू
दिलों जाँ से तुमसे मोहब्बत करते हैं स्वीकार करते हैं
सिर्फ और सिर्फ तुम्ही तो हो मोहब्बत मेरी दिली इकरार करते हैं
शबेशाम तेरी ही आरजुये जिन्दगी इनायत ए मोहब्बत
यही ख्वाहिश लिये ख्वाबगाह में मेरे महबूब तेरा इन्तझार करते हैं
कारवाँओं में गुजर गई जिन्दगी तेरे इन्तजार में
इस जमीनी हकीकत को मेरे महबूब दिल से स्वीकार करते हैं
दिली गुलशन आबाद है तुम्हारी मोहब्बत की महक से
जिन्दगी रंगी है इन्दृधनुषी रंगों में तुम्हारी पायल की खनक से !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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