Monday, 12 December 2016

वफाये वक्त

वक्त के मुताबिक कायनातों फिजा रंग बदलती है
वफा ए मोहब्बत ता उमृ साये में यार मचलती है

जिन्दगी का करवाँ हरेक पल नित नये रंगों में ढलता है
महबूबे मोहब्बत के गेसुओं के तलें प्यार परवान चढता है

अंजान डगर का मुसाफिर तेरे नाल पथ पे बढ जाउँगा
हार कदापी नहीं मानूँगा मंजिल अवश्य ही पाउँगा

आदमियत को रंग बदलते देख आज गिरगिट भी हैरान है
नोटबंदी में मारी गई ममता कहती जनता परेशां है

केजरी के कजरारे नयन नित नई कवायत से परेशाँ हैं
कहते हैं नोटबंदी साजिश नरेन्द मोदी की जनता परेशाँ हैं

मनोहर यादव "अमृत सागर"

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव