वक्त के मुताबिक कायनातों फिजा रंग बदलती है
वफा ए मोहब्बत ता उमृ साये में यार मचलती है
जिन्दगी का करवाँ हरेक पल नित नये रंगों में ढलता है
महबूबे मोहब्बत के गेसुओं के तलें प्यार परवान चढता है
अंजान डगर का मुसाफिर तेरे नाल पथ पे बढ जाउँगा
हार कदापी नहीं मानूँगा मंजिल अवश्य ही पाउँगा
आदमियत को रंग बदलते देख आज गिरगिट भी हैरान है
नोटबंदी में मारी गई ममता कहती जनता परेशां है
केजरी के कजरारे नयन नित नई कवायत से परेशाँ हैं
कहते हैं नोटबंदी साजिश नरेन्द मोदी की जनता परेशाँ हैं
मनोहर यादव "अमृत सागर"
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