Tuesday, 6 December 2016

हमारी मित्रता

हमारी मित्रता जैसे सूरज की धूप पावन निर्मल स्वक्छ श्वेत इसकी उपस्थिती में हरेक रंग निखरता बेशुमार चहकती महकती कायनात निखरती फिजा लाजवाब हरेक रंग कुदरती समाहित उजली सूर्य रश्मी में सारा जहाँ रौशन रौशन ये कायनात सारी जर्रे जर्रा में नूर समाहित जैसे मोहब्बत की महक जैसे चिडियों की चहक जैसे महबूब का सिंगार जैसे चाँदनी की चमक जैसे वसुन्धरा का प्यार कितना हँसी महकता समाँ मोहब्बत का इझहार जैसे पावन सूरज की किरण खिलती नव कलीयाँ महकता सा चमन वैसे ही महकती जिन्दगी मोहब्बत की मादक महक चहकती जिन्दगी नूरे रूखसार यही मोहब्बत यही एतबार मनोहर यादव " अमृत सागर "

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव