हमारी मित्रता
जैसे सूरज की धूप
पावन निर्मल स्वक्छ श्वेत
इसकी उपस्थिती में
हरेक रंग निखरता बेशुमार
चहकती महकती कायनात
निखरती फिजा लाजवाब
हरेक रंग कुदरती
समाहित
उजली सूर्य रश्मी में
सारा जहाँ रौशन
रौशन ये कायनात सारी
जर्रे जर्रा में नूर समाहित
जैसे मोहब्बत की महक
जैसे चिडियों की चहक
जैसे महबूब का सिंगार
जैसे चाँदनी की चमक
जैसे वसुन्धरा का प्यार
कितना हँसी
महकता समाँ
मोहब्बत का इझहार
जैसे पावन सूरज की किरण
खिलती नव कलीयाँ
महकता सा चमन
वैसे ही महकती जिन्दगी
मोहब्बत की मादक महक
चहकती जिन्दगी नूरे रूखसार
यही मोहब्बत यही एतबार
मनोहर यादव " अमृत सागर "
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Tuesday, 6 December 2016
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खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
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कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
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जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
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रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
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