Tuesday, 6 December 2016

हमारी मित्रता



हर घडी हरेक पल दीदारे यार करता हूँ ए मेरी जिन्दगी मोहब्बत बेशुमार करता हूँ शर्मो हया से पलके तेरी उठती नहीं अपनी मोहब्बत का इकरार करती हूँ जालिम जमाने की बेरूखी दिल पे वार करती है छुपाले आशियाना ए दिल में गुजारिश यार करती हूँ चाँदनी ने शबनमी मोतियों की चादर सजाई है ऐ मेरे महबूबे मोहब्बत तेरा इन्तजार एतबार करती हूँ ख्वाबगाह मे तनहाईयों में दीदार करता हूँ तुम्ही तो हो मेरी जिन्दगी मेरी मोहब्बत इकरार करता हूँ मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव