सदियों से
कदम दर कदम
आगे ही आगे
बढता ही जा रहा हूँ मैं
आँधियों और तुफानों से
टकराते हुये निऱबाध गति से
वक्त से कदम मिलाते हुये
बढता ही जा रहा हूँ मैं
बढता ही जा रहा हूँ मैं
नील गगन के तले
महकती फिजाओं में
लरजती कायनात
चहकती हवाओं के साथ
उत्तरोत्तर आगे ही आगे
किसी को परवाह है या नही
बिल्कुल अंजान
मगर नही तनिक हैरान
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ मैं
मेरे पथ का कोई अंत
मंजिल का कोई पता नही
जनम से आज तलक
आगे ही आगे बढता ही जा रहा हूँ मैं
Ocean of Merathus ! आज फिर अम्बर के चाँद में दीदारे यार होगा, चँदा से बरसता मेरे महबूब का शबनमी प्यार होगा |
Sunday, 4 December 2016
अंजान डगर
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
खामोशियो की सागिर्दगी
खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं । मनोहर यादव
-
कच्ची कली कचनार की दिलों को खूब भाती है। इसकी मादक महक आशिको का दिल चुराती है। फिजा को महकाती चार चाँद लगाती है। इसकी मादक महक कामदेव का ...
-
जो दिल के करीब होता है। वो फकत नसीब से होता है। वक्त किसी का अजीज नही है। कर्म से मानव खुशनसीब होता है। कोई हँसता तो कोई रोता ये कर्मो क...
-
रात कविता सपने आई देने लगी मोहब्बत की दोहाई पृियतम तोहे नींद कैसे आई तेरी मोहब्बत ने मेरी निंदिया उडाई
No comments:
Post a Comment