Thursday, 29 December 2016

मोहब्बत मोहब्बत मोहब्बत

मोहब्बत करने वालों का अपना जहाँ होता है
इबादत है मोहब्बत नीचे जमीं उपर आसमाँ होता है

अँखियों ही अँखियों में मोहब्बत का इझहार होता है
दिली धडकनों से प्यार स्वीकार होता है

मोहब्बत रब की इबादत और इनायत यार होती है
आशिकों को मोहब्बत में हरेक हद स्वीकार होती है

मोहब्बते महबूब हुस्न परी यार होती है
आशिक की हरेक ख्वाहिश "रब की रजा" स्वीकार होती है

आशियाना ए दिल में बसाया है मेरे महबूब को !
जालिम जमाने की बुरी नजर से बचाने के लिये !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव