मोहब्बत करने वालों का अपना जहाँ होता है
इबादत है मोहब्बत नीचे जमीं उपर आसमाँ होता है
अँखियों ही अँखियों में मोहब्बत का इझहार होता है
दिली धडकनों से प्यार स्वीकार होता है
मोहब्बत रब की इबादत और इनायत यार होती है
आशिकों को मोहब्बत में हरेक हद स्वीकार होती है
मोहब्बते महबूब हुस्न परी यार होती है
आशिक की हरेक ख्वाहिश "रब की रजा" स्वीकार होती है
आशियाना ए दिल में बसाया है मेरे महबूब को !
जालिम जमाने की बुरी नजर से बचाने के लिये !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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