Thursday, 29 December 2016

नूरे रूखसार से

नूरे रूखसार से रौशन ये कायनातों फिजा
रब की अजीमों करीम नेमत नूरे रूखसार सदा
चाँद की दीवानगी अब कुछ समझ आई
वसुन्धरा पे नजर उसे आई जन्नते हूर महबूब मेरी

दीवानों की दीवानगी उजागर आज सरेशाम हो गई
जन्नते हूर हर दिल का गुरूर मेरी महबूबे मोहब्बत हो गई !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव