नूरे रूखसार से रौशन ये कायनातों फिजा
रब की अजीमों करीम नेमत नूरे रूखसार सदा
चाँद की दीवानगी अब कुछ समझ आई
वसुन्धरा पे नजर उसे आई जन्नते हूर महबूब मेरी
दीवानों की दीवानगी उजागर आज सरेशाम हो गई
जन्नते हूर हर दिल का गुरूर मेरी महबूबे मोहब्बत हो गई !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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