गर वक्त है पास तुम्हारें
आओ पास मिलकर गुजारे
कुछ बातें जो है दिलों में
हमारे तुम्हारे हम तुम जानें
एक दूजे को पहचाने
क्या होती हैं मोहब्बत
क्या होते हैं माइने जिन्दगी के
इक दूजे के अरमाँ दिलों के
आओं हम तुम जाने
मोहब्बत बिन अधूरी है जिन्दगी
जिन्दगी अधूरी है बिन तुम्हारे
अधूरी है जिन्दगी की जो कहानी
आज जाने तुम्हारी जुबानी
कभी हमारी जुबानी
वो महकते मोहब्बत भरे लम्हें
जो तेरे गेसुओं के शाये मे थे गुजरे
जब मेरी चाहत को था तुमने जाना
जब ख्वाबगाह की ख्वाहिशे ऱंगी थी तुमसे
जब मेरी नींद में ख्वाब देखती थी तुम
तनहाईयों में अक्सर दीदारे यार होता था
महकती थी जिन्दगी तुम्हारी यादों की महक से
धूल भरी आंधियों में तुम्हारा दीदार होता था
हमारी मोहब्बत की बस एेसी ही कुछ कहानी थी
जो तुम्हारी जुबानी थी
अपने हाथों में हाथ तुम्हारा था
जब पहले पहल तुमने
मुझे मेरे नाम से नही
पृियतम प्यारे पुकारा था
बहुत हँसी वो नजारा था
चाँदनी ने वसुन्धरा का दामन
शबनमी मोतियों से सँवारा था
शेफाली ने महकाई कायनातों फिजा
मोहब्बत से चहका जर्रा जर्रा ए कायनातों फिजा
जब तुमने दिल पे मेरे हाथ रखा
बढ गई थी दिल की धडकन
अचानक पृियतम
मानों भूचाल आ गया हो
एक एक कोशिका ने ली थी अंगडाई पृियतम
मेरे कंधों को मिला
ऐक नया जोश
मोहब्बत का
जो ख्वाहिश थी जिन्दगी की
मानो पूरी हो गई थी आज
महकती हुई जिन्दगी
महकती हुई मोहब्बत
का दीदार किया मैने
जिन्दगी अपनी मोहब्बत का
इझहार किया मैंने
आओ पास मिलकर गुजारे
कुछ बातें जो है दिलों में
हमारे तुम्हारे हम तुम जानें
एक दूजे को पहचाने
क्या होती हैं मोहब्बत
क्या होते हैं माइने जिन्दगी के
इक दूजे के अरमाँ दिलों के
आओं हम तुम जाने
मोहब्बत बिन अधूरी है जिन्दगी
जिन्दगी अधूरी है बिन तुम्हारे
अधूरी है जिन्दगी की जो कहानी
आज जाने तुम्हारी जुबानी
कभी हमारी जुबानी
वो महकते मोहब्बत भरे लम्हें
जो तेरे गेसुओं के शाये मे थे गुजरे
जब मेरी चाहत को था तुमने जाना
जब ख्वाबगाह की ख्वाहिशे ऱंगी थी तुमसे
जब मेरी नींद में ख्वाब देखती थी तुम
तनहाईयों में अक्सर दीदारे यार होता था
महकती थी जिन्दगी तुम्हारी यादों की महक से
धूल भरी आंधियों में तुम्हारा दीदार होता था
हमारी मोहब्बत की बस एेसी ही कुछ कहानी थी
जो तुम्हारी जुबानी थी
अपने हाथों में हाथ तुम्हारा था
जब पहले पहल तुमने
मुझे मेरे नाम से नही
पृियतम प्यारे पुकारा था
बहुत हँसी वो नजारा था
चाँदनी ने वसुन्धरा का दामन
शबनमी मोतियों से सँवारा था
शेफाली ने महकाई कायनातों फिजा
मोहब्बत से चहका जर्रा जर्रा ए कायनातों फिजा
जब तुमने दिल पे मेरे हाथ रखा
बढ गई थी दिल की धडकन
अचानक पृियतम
मानों भूचाल आ गया हो
एक एक कोशिका ने ली थी अंगडाई पृियतम
मेरे कंधों को मिला
ऐक नया जोश
मोहब्बत का
जो ख्वाहिश थी जिन्दगी की
मानो पूरी हो गई थी आज
महकती हुई जिन्दगी
महकती हुई मोहब्बत
का दीदार किया मैने
जिन्दगी अपनी मोहब्बत का
इझहार किया मैंने
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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