इतना हक हे चाहत हमारी
ये कहने का हक कृतिका मुझे दे दो
चाहें बदले में ले लो जिन्दगानी हमारी
तुम्हारी रूबाईयाँ लगती है प्यारी
महकती सी लगती है जैसे फुलवारी
चाँदनी के शबनमी मोतियों की जैसे पूनम से यारी
हरेक संय मे नजर आती है मोहक छवि तुम्हारी
अब और दुरियों को पूर्ण विराम तुम दे दो
जिन्दगी में कोहरा घना छा गया है
इसे अल्प विराम तुम दे दो
महकती हुई जिन्दगी थी इसे वापस मुस्कान तुम दे दो
मनोहर यादव " अमृत सागर "
ये कहने का हक कृतिका मुझे दे दो
चाहें बदले में ले लो जिन्दगानी हमारी
तुम्हारी रूबाईयाँ लगती है प्यारी
महकती सी लगती है जैसे फुलवारी
चाँदनी के शबनमी मोतियों की जैसे पूनम से यारी
हरेक संय मे नजर आती है मोहक छवि तुम्हारी
अब और दुरियों को पूर्ण विराम तुम दे दो
जिन्दगी में कोहरा घना छा गया है
इसे अल्प विराम तुम दे दो
महकती हुई जिन्दगी थी इसे वापस मुस्कान तुम दे दो
मनोहर यादव " अमृत सागर "
No comments:
Post a Comment