Monday, 26 December 2016

जिन्दगी की मुस्कान है मोहब्बत

बाद मुद्दत के दीदारे यार हुआ
धडकने बढ गई दिल को एतबार हुआ
मौसम के साथ दिल बदलने का इकरार हुआ
तेरे सदके माफी हम माँगते है जिन्दगी
सूरज के उगने का आज एतबार हुआ
नफरत सी गई थी जिन्दगी से हमें
रूठ गई थी लेखनी जो कभी थी पृियतम
आज दीदारे यार से लेखनीं को मिली साँसे एतबार हुआ
आइने में बदलती शख्सियत का इकरार
रब की इनायत जो बरसी हमपे इकरार हुआ
गुम हो चुकी थी मुस्कान लब से
तुम को देखा तो उसकी रहमत पे एतबार हुआ
गुम हो चुकी थी मुस्कान जिन्दगी से
तुम को देखा तो जिन्दगी का एतबार हुआ
करम यार हम पे करों हमरी पृरणा लौटा दो हमे
एक भटके हुये राही को डगर दिखा दो यार
अब और इम्तहाँ न लो करो एतबार सनम
पथराई आँखों को लौटा दो रौशनी सनम
जिन्दगी का नूर गुम हो चुका है नूरे रूखसार से
जिन्दगी में शबनमी नूर भर के जीने की आरजू दे दो !
मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव