Sunday, 15 January 2017

दौलत

जहाँ की दौलत हमने पाई
शुकूँ अलविदा ए जिन्दगी हुयें
सब कुछ पाके भी
उनकी इनायत के मोहताज हम हुयें !
जिन्दगी में सब कुछ दौलत यार नही होती
महबूबे मोहब्बत दौलत की खनक में गिरफ्तार नही होती !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव