Sunday, 15 January 2017

मोहब्बत भरे अल्फाज

मोहब्बत भरे अल्फाजों से
उसने दिल पे वार किया
कसम पाक परवरदिगार की
एक ही झटके में दिल को
तार तार किया

उफ ना कर पाये थे हम
बाहों में भरकर लबों से
लबों को बे-अल्फाज किया
अमृत का स्वाद हमने चखा
जन्नते हूर के होने का एतबार किया

उनके खामोशी भरे वार से
घायल सदा के लिये यार हुये
महबूबे मोहब्बत की महक
पोर पोर में समाई गिरफ्तार हम हुए

चाँदनी के शबनमी मोतियों की मानिंद
दो जिस्म एक दूजे की मोहब्बत में गिरफ्तार हुये !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव