मोहब्बत भरे अल्फाजों से
उसने दिल पे वार किया
कसम पाक परवरदिगार की
एक ही झटके में दिल को
तार तार किया
उफ ना कर पाये थे हम
बाहों में भरकर लबों से
लबों को बे-अल्फाज किया
अमृत का स्वाद हमने चखा
जन्नते हूर के होने का एतबार किया
उनके खामोशी भरे वार से
घायल सदा के लिये यार हुये
महबूबे मोहब्बत की महक
पोर पोर में समाई गिरफ्तार हम हुए
चाँदनी के शबनमी मोतियों की मानिंद
दो जिस्म एक दूजे की मोहब्बत में गिरफ्तार हुये !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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