तुम्हीं को तुमसे चुरा लेंगें
महक शबनमी मोहब्बत की
दिल में हम बसा लेंगें
मोहब्बत में वफा करके
अपना तुम्हें बना लेंगें
मोहब्बत के बंधन में बाँध
आशियाना-ए-दिल में
सदा सदा के लिये बसा लेंगें
मोहब्बत के बंधन को
भला कैसे तोड पाओगें
जनम जन्मांतर तक
हमारे दिल में बस जाओगें
हरेक जनम तुम्हें पाने की
ख्वाहिश ऱब से यार करेंगें
तुम्हीं जिन्दगी हो हमारी
अपनी जाँ दिल में बसा लेंगें !
- मनोहर यादव " अमृत सागर "

No comments:
Post a Comment