मौंजों से मोहब्बत किश्ती की
मौंजें भव पार लगाती हैं
आवेग में मौजें जब आती हैं
साहिल की बाहों में समाती हैं
मौजें अठखेलियाँ करती किश्ती से
अपनी गोद खिलाती हैं
अंजान भंवर के चकृव्युह से
शक्तिशाली मौंजें ही किश्ती बचाती हैं भव पार लगाती हैं
जग जाहिर है मोहब्बत साहिल से मौंजों की
मौंजें सरेशाम साहिल की बाहों में समाती हैं
अंजान भृमर के शैतानी व्युह से किश्ती को बचाती हैं !
मौंजों का छेत्र अति विशाल है होता सागर में धमाचौंकडी मचाती हैं
थक हार जब बहकने लगती पृियतम साहिल की गोद समाती हैं !
माँझीं से मोहब्बत मौंजों की यार समझ नही आती है
माँझी की मोहब्बत में डूबके मौंजें किश्ती को किनारे लगाती हैं !
हरेक किश्ती को मिलता नही किनारा भृम जाल में कुछ फस जाती हैं !
एक बार भृमित भृमजाल में फसी किश्ती कभी किनारा नही पाती हैं अपना वजूद गँवाती है !
मौंजें बेपनाह मोहब्बत साहिल से हैं करती ,
वक्त बेवक्त बाहों साहिल की में समाती हैं
साहिल की मोहब्बत में एसे हैं डूबती
मौंजें अपना असतित्व गँवाती हैं साहिल की मोहब्बत पाती हैं
मनोहर यादव " अमृत सागर "
No comments:
Post a Comment