Sunday, 22 January 2017

मौंजो की अठखेलियाँ

मौंजों से मोहब्बत किश्ती की
मौंजें भव पार लगाती हैं
आवेग में मौजें जब आती हैं
साहिल की बाहों में समाती हैं

मौजें अठखेलियाँ करती किश्ती से
अपनी गोद खिलाती हैं
अंजान भंवर के चकृव्युह से
शक्तिशाली मौंजें ही किश्ती बचाती हैं भव पार लगाती हैं

जग जाहिर है मोहब्बत साहिल से मौंजों की
मौंजें सरेशाम साहिल की बाहों में समाती हैं
अंजान भृमर के शैतानी व्युह से किश्ती को बचाती हैं !

मौंजों का छेत्र अति विशाल है होता सागर में धमाचौंकडी मचाती हैं
थक हार जब बहकने लगती पृियतम साहिल की गोद समाती हैं !

माँझीं से मोहब्बत मौंजों की यार समझ नही आती है
माँझी की मोहब्बत में डूबके मौंजें किश्ती को किनारे लगाती हैं !

हरेक किश्ती को मिलता नही किनारा भृम जाल में कुछ फस जाती हैं !
एक बार भृमित भृमजाल में फसी किश्ती कभी किनारा नही पाती हैं अपना वजूद गँवाती है !

मौंजें बेपनाह मोहब्बत साहिल से हैं करती ,
वक्त बेवक्त बाहों साहिल की में समाती हैं
साहिल की मोहब्बत में एसे हैं डूबती
मौंजें अपना असतित्व गँवाती हैं साहिल की मोहब्बत पाती हैं

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव