Tuesday, 24 January 2017

खिडकी

पहले पहल इसी खिडकी से दीदारे यार किया मैनें
महकती वादियों में अपनी मोहब्बत का इझहार किया मैनें
इसी खिडकी में चुपके चुपके तेरा इन्तजार किया मैनें
दुनियाँ को मोहब्बत भरी नजरों से पहले पहल देखा यार मैनें
उमडते घुमडते घनियारे मेघों का एतबार किया मैनें
पूनम की शबनमी चाँदनी की मोहब्बत का दीदारे यार किया मैनें
शबनमी मोतियों की मरमरी चादर पर बेकरार हुस्न का दीदार किया मैनें
महकती शबनमी कायनातों फिजा का एतबार किया मैनें
कुदरत का सिंगार करते सप्तरंगी इन्दृधनुष का दीदार किया मैनें
बसंत को कुदरत का सिंगार करते दीदार किया मैनें
ये वही खिडकी है मेरी नजरो जिन्दगी का दीदार किया पहले पहल !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव