तुमसे मोहब्बत करने की तमन्ना दिल में रखते हैं
मगर जब सामने पाते हैं कहना भूल जाते हैं
जब तुम्हारी महकती जुल्फें हवा में लहराती हैं
हम अपनी सुध बुध तक यार भूल जाते हैं भूल जातो है
जब तुम्हारे महकते शबनमी जिस्म की महक हवाओ से पाते हैं
तुम्हारी कसम चुम्बक की मानिंद हम खिचते हुये चले आते हैं
तुम्हारी नूरे रूखसार से उज्जवलित है कायनातों फिजा
तुम्हारे नुरे रूखसार में हम खुद को तुम्हारी मोहब्बत में कैदी पाते हैं !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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