Sunday, 22 January 2017

मोहब्बत का एतबार

पूनम की चाँदनी के शबनमी मोतियों में दीदारे यार करते हैं
ए फलक की चाँदनी हम अपनी मोहब्बत का एतबार करते हैं !

आँधी तुफाँ और मादक मौंजों का दिली एतबार है
सहराओं से मोहब्बत है जिन्दगी का एतबार है !

शबनमी चाँदनी के शबनमी मोतियों से सिंगार ए हुस्न यार करते हैं
हम अपनी मोहब्बत पे सरेशाम जाँ निशार करते हैं !

परवाना हूँ शमाँ ए मोहब्बत का मेरे महबूब मेरे यार
जान की बाजी लगाकर कर करता तुमसे मोहब्बत तुमसे प्यार !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव