पूनम की चाँदनी के शबनमी मोतियों में दीदारे यार करते हैं
ए फलक की चाँदनी हम अपनी मोहब्बत का एतबार करते हैं !
आँधी तुफाँ और मादक मौंजों का दिली एतबार है
सहराओं से मोहब्बत है जिन्दगी का एतबार है !
शबनमी चाँदनी के शबनमी मोतियों से सिंगार ए हुस्न यार करते हैं
हम अपनी मोहब्बत पे सरेशाम जाँ निशार करते हैं !
परवाना हूँ शमाँ ए मोहब्बत का मेरे महबूब मेरे यार
जान की बाजी लगाकर कर करता तुमसे मोहब्बत तुमसे प्यार !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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