Tuesday, 31 January 2017

नूरे रूखसार

तुम्हारी मोहब्बत में बिताये वो स्वर्णिम पल याद आते हैं
दिल की बेचेनी बढाते हैं तनहाईयों में बहुत सताते हैं

गमें जिन्दगी हुई थी रौशन तुम्हारे नूरे रूखसार
वो मोहब्बत में लबरेज हँसी लम्हें दिल की धडकन बढाते हैं

दरियायें जिस्म की मोहताज मोहब्बत नही होती
आशिकी शक्लों सूरत की मोहताज नहीं होती

आज ख्वाबगाह महक उठी उनकी रूहानी महक से
बयार ओ बासंती महबूब के आने का सबब फकत होती हैं

जहाँ से कूच करने में तनिक भी देरी नही करते दीवाना ए मोहब्बत
उनकी मोहब्बत की महक से महकती है कायनातों फिजा यारों !

मनोहर यादव "अमृत सागर"

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव