Tuesday, 31 January 2017

बसंत आगमन

नव बसंत आगमन महकने लगी कायनातों फिजा
महक लगी कुँज गलियाँ महक उठा वृन्दावन
नित नव कोंपल नित नव कलियाँ नित नव फूल
नव केशर मुस्कान महक उठी वसुन्धरा और धूल

अठखेलियाँ करती सी लगती वसुन्धरा महकती धूल
आमृ मंजरी खिलखिलाके हँस रही कुहूक उठी कोयल
कुमुदनी चहक उठी बासंती बेला बेला में
गुँज उठी कायनातों फिजा उठी भृमर हूक
रितुराज बसंत आगमन भयो री सखी मत अब भूल

मनोहर यादव "अमृत सागर"

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव