Monday, 30 January 2017

तेरी मदहोश आँखें

तेरी आँखें है या छलकते हुये मय के पैमाने
सहराओं में दहकती उमस या मोहब्बत के अफसाने
तेरे लब ज्यों छलकते हुये मादक मयखाने
हम तो तेरे हो ही चुके अंजामें मोहब्बत रब जाने

रूह में बसी केशर सम मादक महक तेरे जिस्म की
उफ ये तिलिस्मी खजाना ए मोहब्बत मेरी जिन्दगी रब जाने
तुही मुकद्दर तुही चाहत ए मेरे महबूब मेरे सनम
तुझे भुलाना जिन्दगी को अलविदा कहना रब जाने !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव