तेरी आँखें है या छलकते हुये मय के पैमाने
सहराओं में दहकती उमस या मोहब्बत के अफसाने
तेरे लब ज्यों छलकते हुये मादक मयखाने
हम तो तेरे हो ही चुके अंजामें मोहब्बत रब जाने
रूह में बसी केशर सम मादक महक तेरे जिस्म की
उफ ये तिलिस्मी खजाना ए मोहब्बत मेरी जिन्दगी रब जाने
तुही मुकद्दर तुही चाहत ए मेरे महबूब मेरे सनम
तुझे भुलाना जिन्दगी को अलविदा कहना रब जाने !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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