तनहाईयों में फकत तेरी यादों का ही सहारा है
वरना जिन्दगी ओ जहाँ ने कर लिया किनारा है
मौत सबब समापन जिन्दगी यार होती है
हमें जीते जी तेरी मोहब्बत ने मारा है
हम तो पहले ही जिन्दगी तेरे ही नाम लिख चुके है सनम
अब तो ये जिन्दगी फकत तेरी यादों के सहारे है
मोहब्बत में चालाकियों से अंजान है हम
इसके चलते महबूबे मोहब्बत ने कर लिया किनारा है
नूरे रूखसार से रौशन से रौशन थी जिन्दगी अपनी
अब तो मोहब्बत में गर्दिशों ने दामन पसारा है
यकीं हमकों था मौंजें एक दिन आयगीं जिन्दगी में
साहिल ने इसी उम्मीद में जीवन अपना गुजारा है
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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