Saturday, 28 January 2017

बेरूखी

उनकी बेरूखी जाने कैसे सबब ए मोहब्बत हो गई
सारी जिन्दगी महबूब की शबनमी मोहब्बत की नजर हो गई
मोहब्बत की पाकीजगीं का एतबार दिल को हुआ
माऩों शेफाली की शबनमी महक से जिन्दगी को प्यार हुआ

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव