गमें जिन्दगी के अँधेरे हमें रास आने लगे है
ख्वाबगाह की तनहाईयों में बहुत अधिक सताने लगे हैं
मोहब्बत अजीमों करीम नेमत रब की मेहर यार होती है
ये इबादत ओ इनायत रब की मेरी सरकार होती है
मोहब्बत का शबब सैलाभे अश्क यार होता है
मोहब्बत में जाँ की बाजी खेलने को महबूब तत्पर सरकार होता है
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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