Friday, 27 January 2017

मोहब्बत वरदान रब का

गमें जिन्दगी के अँधेरे हमें रास आने लगे है
ख्वाबगाह की तनहाईयों में बहुत अधिक सताने लगे हैं

मोहब्बत अजीमों करीम नेमत रब की मेहर यार होती है
ये इबादत ओ इनायत रब की मेरी सरकार होती है

मोहब्बत का शबब सैलाभे अश्क यार होता है
मोहब्बत में जाँ की बाजी खेलने को महबूब तत्पर सरकार होता है

मनोहर यादव " अमृत सागर "

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव