बासंती फिजा में नूरे रूखसार से आया ऩिखार
केशर सम मादक महक से महकी कायनातों फिजा
पूनम की चाँदनी से टपकती शबनमी मोतियों की फुहार
महबूबे मोहब्बत की महक से महकता ये जहाँ संसार
नूरे रूखसार से निखर गई है चाँदनी
चाँदनी के शबनमी मोतियों से निखरा हुस्नों शबाब
हुस्नों शबाब से महकती है कायनातों फिजा
जिन्दगी रौशन होते हैं नूरे रूखसार से सरेशाम
मौसम ने ली अंगडाई चहक उठा हुस्नों शबाब
पल पल चाँदनी से टपकती शबनमी मोतियों की फुँहार !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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