Saturday, 14 January 2017

मोहब्बत

बासंती फिजा में नूरे रूखसार से आया ऩिखार
केशर सम मादक महक से महकी कायनातों फिजा

पूनम की चाँदनी से टपकती शबनमी मोतियों की फुहार
महबूबे मोहब्बत की महक से महकता ये जहाँ संसार

नूरे रूखसार से निखर गई है चाँदनी
चाँदनी के शबनमी मोतियों से निखरा हुस्नों शबाब

हुस्नों शबाब से महकती है  कायनातों फिजा
जिन्दगी रौशन होते हैं नूरे रूखसार से सरेशाम

मौसम ने ली अंगडाई चहक उठा हुस्नों शबाब
पल पल चाँदनी से टपकती शबनमी मोतियों की फुँहार !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव