कभी कभी जिन्दगी में ऐसा वक्त भी आता है
अपना शाया भी साथ छोड जाता है
दिली तमन्नायें लेती है अंगडाई
महबूबे मोहब्बत सरेशाम मुस्कुराता है
कभी कभी जिन्दगी में कोहरा यार छा जाता है
नूरे रूखसार से जिन्दगी में भोर यार आता है
मासुमियत भरी मुस्कान का वजूद है जिन्दगी
कभी सैलाभे अश्क कभी खुशियों की महक है जिन्दगी
वो पृेरणा है हमें जिनकी चाहत में डगर भटक गये थे हम
नई डगर बना कर उनकी महक से आज दो चार हैं !
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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