Saturday, 14 January 2017

कभी कभी जिन्दगी में

कभी कभी जिन्दगी में ऐसा वक्त भी आता है
अपना शाया भी साथ छोड जाता है

दिली तमन्नायें लेती है अंगडाई
महबूबे मोहब्बत सरेशाम मुस्कुराता है

कभी कभी जिन्दगी में कोहरा यार छा जाता है
नूरे रूखसार से जिन्दगी में भोर यार आता है

मासुमियत भरी मुस्कान का वजूद है जिन्दगी
कभी सैलाभे अश्क कभी खुशियों की महक है जिन्दगी

वो पृेरणा है हमें जिनकी चाहत में डगर भटक गये थे हम
नई डगर बना कर उनकी महक से आज दो चार हैं !

मनोहर यादव " अमृत सागर "

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खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव