तुमसे मेरी जिन्दगी की मुस्कान है
तुमसे मेरी जिन्दगी के अरमांन है
सब कुछ तुमसे मैंने पाया है
मेरे सनम इस जिन्दगी में
मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए रब से
मेरी चाहत है तुम स्वयं देखो
मेरी मोहब्बत तुम्हारे लिए
सिर्फ तुम्हारे लिए
विशाल सागर के सामान है
मैं चाहता हूँ
तुम मेरे मादक लैब चूमो
अपनी बाहों में झप्पी लेकर
अनंन्त काल तक तुम मुझे प्यार करो
सारी निशा बीत जाये
तुम्हारी बाहों के घेरे में
प्रियतम तुम मेरे दिल में
आशियाना ए दिल में रहते हो
तुम रूह हो मेरे जिस्म की
मेरे जिस्म की हरेक सांस तुमसे है
सिर्फ और सिर्फ तुम्ही मेरा प्यार हो
मेरी जिंदगी और मेरी चाहत
अंतिम सांस तक
सिर्फ तुम्ही तो हो
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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