Wednesday, 1 February 2017

मेरी जिन्दगी की मुस्कान




 तुमसे  मेरी जिन्दगी की मुस्कान है
 तुमसे मेरी जिन्दगी  के अरमांन  है
 सब कुछ तुमसे मैंने पाया है
मेरे सनम इस जिन्दगी  में
मुझे इससे ज्यादा कुछ नहीं चाहिए रब से
मेरी चाहत है तुम स्वयं देखो
मेरी मोहब्बत तुम्हारे लिए
सिर्फ तुम्हारे लिए
विशाल सागर के सामान है
मैं  चाहता हूँ
तुम मेरे मादक लैब चूमो
अपनी बाहों  में झप्पी लेकर
अनंन्त काल तक तुम मुझे प्यार करो
सारी  निशा बीत  जाये
तुम्हारी बाहों  के घेरे में
प्रियतम तुम मेरे दिल में
आशियाना ए दिल में रहते हो
तुम रूह हो मेरे जिस्म की
मेरे जिस्म की हरेक सांस तुमसे है
सिर्फ और सिर्फ तुम्ही मेरा प्यार हो
मेरी जिंदगी और मेरी चाहत
अंतिम सांस तक
सिर्फ तुम्ही तो हो

मनोहर यादव " अमृत सागर "




No comments:

Post a Comment

खामोशियो की सागिर्दगी

खामोशियो की सागिर्दगी सबब ए जिन्दगानी यार है । तनहाइयो में तेरी मोहब्बतो यादें सनम एतबार हैं ।  मनोहर यादव