नूरे रूखसार से रौशन ये जहाँ है
ये शबनमी वसुन्धरा और आसमाँ
नूरे रूखसार की कशिश से घायल हम हुये
तेरी मोहब्बत की मादक महक के कायल हम हुये
नूरे रूखसार जैसे सूरज की पहली किरण
तेरा जिन्दगी में आना ज्यों कस्तूरी से बहका हिरण
नूरे रूखसार मेरी जिन्दगी मेरी सरकार
मोहब्बत की तडप में मचलता महबूब यार
तेरी अँखियों ने एसा जादू किया है
तनहाईयाँ बे पर्दा मेरे यार हो गई
मनोहर यादव " अमृत सागर "
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